चिड़िया नहीं,अब भारत को सोने का बाज बनाना है।।
यह पवित्र - पावन भूमि है, यह देश विश्व गुरु है।
सिंधु ज्वार, गंगा की धार, धर्म ज्ञान यहीं शुरू है।।
वेदों का संसार यहाँ, ज्ञान का महासागर यहाँ।
हर कंकर में शंकर है, मानवता का आधार यहाँ।।
पर इस अतुल्य भारत में पनपी आज बुराई है।
उखाड़ फेंकने की जिसे जड़ से कसम हमने खाईहै।।
प्रेम और भाईचारे से , भारत को बलवान बनाना है।
चिड़िया नहीं अब भारत को सोने का बाज बनाना है।।
भ्रष्ट लोग और आतंकी भारत में तनकर बैठे है।
जातिवाद और आतंकवाद कुंडली मारकर बैठे है।।
मिटा दो यह कलंक अब धर्म व आरक्षण का।
तिलक लगाओ माथे पर मानवता के रक्षण का।।
चीनी सामान-उत्पादों का अब तुम बहिष्कार करो।
स्वदेशी अपनाकर अब भारतीयता का प्रचार करो।।
सारे जग में अब हमें तिरंगे की शान बढ़ाना है।
चिड़िया नहीं अब भारत को सोने का बाज बनाना है।।
पास में ही गद्दार बहुत है, घर में आग लगाने को।
कस ली है अब कमर हमने दंगों को दबाने को।।
लगता है नापाक आदत तुम्हारे यहाँ एक रस्म है।
निर्दोषों की हत्या की क्या खाई तुमने कसम है??
न तुम सुधरे हो, न तुम सुधरोगे कभी।
हर मौत का जवाब अब मुँह तोड़कर देंगे हम सभी।।
डर व हैवानियत मिटाकर अब प्रेम के दीपक जलाना है।
चिड़िया नहीं भारत को अब सोने का बाज बनाना है।।
क्या भूल गए वो दिन जब तुमको धूल चटाई थी।
भारत रक्षा की खातिर सीने पर गोली खाई थी।।
उरी , क्वेटा, पठानकोट में आतंकी जब हैवान थे।
देख वीरों की वीरता को वो दानव भी हैरान थे।।
कश्मीर नहीं हथिया सकते, तुम हमलों से संहारों से।
भारत को नहीं झुका सकते तुम अपने अत्याचारों से।।
कोई आँख उठाकर न देखे अपने इस सिरमौर को।
चलो मिटायें बन्दूकों, बम्बों, आतंकियों के शोर को।।
एक नया हौसला, नयी उमंग, नया विश्वास जगाना है।
चिड़िया नहीं भारत को अब सोने का बाज बनाना है।।
