मैं तिरँगा हूँ
भारत की गर्वित गाथा गाता,
अटूट –प्रेम –सौहार्द में रंगा हूँ |
विश्व – गुरु की प्रतिष्ठा बनाये,
मैं स्वच्छंद- संपन्न तिरंगा हूँ | 🇮🇳
हिन्दू – मुस्लिम,सिक्ख, ईसाई,
मैं तो सर्वधर्म में भंगा हूँ |
एक सूरज – चंदा, एक लहू का,
मैं स्वच्छंद – संपन्न तिरंगा हूँ |🇮🇳
ब्राह्मण, शुद्र हो या वैश्य, क्षत्रिय,
मैं हर, जात, वर्ण के संगा हूँ |
‘मानवता’ ही बस एक जात रचाये,
मैं स्वच्छंद – सम्पन्न तिरंगा हूँ |🇮🇳
कृष्णा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र, कोसी
और मैं ही भारत की गंगा हूँ |
सब नदियों की धारा समेटे ,
मैं स्वच्छंद– सम्पन्न तिरंगा हूँ ||🇮🇳
अरावली – नीलगिरि सा विशाल,
मैं हिमालय ,मैं ही कंचनजंगा हूँ |
भारत को उच्चतम शिखर पर रखे,
मैं स्वच्छंद – सम्पन्न तिरंगा हूँ ||🇮🇳
प्रेमचंद, पंत, अज्ञेय, वर्मा जी की,
अद्भुत रचनाओ की अभ्रगंगा हूँ |
साहित्यिक आनंद के रस में डूबा ,
मैं स्वच्छंद – सम्पन्न तिरंगा हूँ ||🇮🇳
उत्तर की वादी, पश्चिम का रण,
पूर्व – दक्षिण मिलन का बंगा हूँ |
सब जन के तन-मन में बसता
मैं स्वच्छंद– सम्पन्न तिरंगा हूँ ||🇮🇳
सुदृढ़ सोच, सुबल उमंग – तरंग,
सशक्त दृष्टिकोणों की मृदंगा हूँ |
‘श्रेष्ठ भारत,अतुल्य भारत’ का प्रतीक
मैं स्वच्छंद – सम्पन्न तिरंगा हूँ ||🇮🇳
🇮🇳🇮🇳 जय हिंद, जय भारत🙏🙏


